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| Image: Facebook, Umashankar singh. |
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: 25 फरवरी 2026 की सुबह लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में जब सूरज अभी पूरी तरह नहीं निकला था, तभी 50 से ज्यादा आयकर अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ तीन गाड़ियों में पहुंच गए। उनका निशाना था – बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उत्तर प्रदेश में इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का आवास। घर को चारों तरफ से घेर लिया गया। किसी को अंदर-बाहर जाने नहीं दिया गया। दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल और हर उस चीज को खंगाला जा रहा था जो वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़ी हो सकती है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। लेकिन सवाल सबसे बड़ा ये है – जब नेता कैंसर जैसी घातक बीमारी से दो साल से जूझ रहा हो, आइसोलेशन में हो, विधानसभा सत्र तक न आ पा रहा हो, तो इतनी बड़ी कार्रवाई का टाइमिंग क्यों?
उमाशंकर सिंह कौन हैं? बलिया का वो चेहरा जो बसपा की लाज बचा रहा है
उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं – 2012, 2017 और 2022 में। 2022 के चुनाव में पूरे पूर्वांचल में भाजपा की लहर के बावजूद उन्होंने बसपा की झंडी बचाकर रखी। मायावती के बेहद करीबी माने जाते हैं। बलिया के ग्रामीण इलाकों में उन्हें “गरीबों का मसीहा” कहा जाता है।
2016 में उन्होंने 351 हिंदू-मुस्लिम जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया था – एक ऐसा काम जो आज भी लोग याद करते हैं। वे PWD के बड़े ठेकेदार भी हैं। उनकी कंपनी Student Shakti Infra Construction जैसी फर्म्स पूर्वांचल में सड़क, पुल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रही हैं। लेकिन ठेकेदारी और राजनीति का मेल हमेशा विवादों में रहा। 2013 में लोकायुक्त में शिकायत हुई कि वे MLA रहते सरकारी ठेके ले रहे हैं। जांच में दोषी पाए गए और 2015 में सदस्यता रद्द भी हुई। हाईकोर्ट और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बाद 2017 में फिर जीतकर वापसी की।
आज वे कैंसर से जूझ रहे हैं। दो साल से घर में आइसोलेशन में हैं। डॉक्टर-नर्स को भी आसानी से आने की अनुमति नहीं मिलती। विधानसभा सत्र में नहीं पहुंच पाते। BSP की बैठकें भी छूट रही हैं। परिवार के सदस्य बताते हैं कि सांस लेना भी अब चुनौती बन गया है।
छापेमारी का पूरा सच: लखनऊ से बलिया तक क्या-क्या हुआ?
लखनऊ गोमतीनगर सुबह ठीक 7 बजे टीम पहुंची। आवास और ऑफिस दोनों जगह सर्च शुरू। अधिकारियों ने फाइलें, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स को सीज किया। पूरा इलाका पुलिस ने घेर लिया। पड़ोसी तक हैरान।
बलिया – खनवर (पैतृक घर), रसड़ा का होटल 'Sky' और कंपनी प्लांट करीब 10 बजे तीन गाड़ियां पहुंचीं। पैतृक घर पर विधायक के भाई रमेश सिंह मौजूद थे। कंपनी प्लांट (Student Shakti Infra) को सील कर दिया गया। परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल जब्त कर लिए गए। दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
आयकर विभाग ने अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। सूत्र बता रहे हैं कि जांच “अनुपातहीन संपत्ति” और “वित्तीय लेन-देन” से जुड़ी है। लेकिन ठोस सबूत या जब्त राशि की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं।
क्या यह सिर्फ टैक्स जांच है या राजनीतिक संदेश?
भारत में हर नागरिक को कानून के सामने बराबर होना चाहिए – चाहे वह कोई भी हो। आयकर विभाग का काम है काले धन पर नकेल कसना। लेकिन सवाल टाइमिंग का है। बसपा यूपी में पहले से कमजोर है। एकमात्र विधायक बीमार है। 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में यह कार्रवाई बसपा कार्यकर्ताओं में “निशाना” होने का डर पैदा कर रही है।
दूसरी तरफ, ठेकेदार-राजनेताओं के मामले में जांच जरूरी भी है। पूर्वांचल में इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में करोड़ों के टेंडर होते हैं। अगर कोई अनियमितता है तो जांच होनी चाहिए। लेकिन बीमार व्यक्ति के घर पर इस तरह की छापेमारी मानवीय संवेदनाओं पर भी सवाल खड़ी करती है। संविधान अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार हर किसी को है – जांच और स्वास्थ्य दोनों का सम्मान होना चाहिए।
बहुजन समाज की राजनीति हमेशा “सामाजिक न्याय” की बात करती आई है। जब उनके एकमात्र प्रतिनिधि पर कार्रवाई होती है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं – क्या यह वाकई निष्पक्ष है या सत्ता का दबाव?
सामाजिक प्रभाव और भविष्य पर असर
- BSP पर असर – मायावती पहले ही पार्टी को फिर से खड़ा करने की कोशिश में हैं। अगर जांच में कुछ गड़बड़ी निकली तो पार्टी की छवि और खराब होगी। अगर कुछ नहीं निकला तो “राजनीतिक प्रतिशोध” का नैरेटिव मजबूत होगा।
- पूर्वांचल की राजनीति – बलिया-रसड़ा क्षेत्र में सिंह परिवार की अच्छी पकड़ है। स्थानीय स्तर पर सहानुभूति बढ़ सकती है।
- ठेकेदार राजनेता – यूपी में कई नेता ठेकेदारी करते हैं। यह कार्रवाई उन सबके लिए चेतावनी है।
- 2027 चुनाव – अगर जांच लंबी चली तो BSP को नुकसान, लेकिन अगर साफ छूट गए तो सहानुभूति वोट मिल सकता है।
क्या कहता है कानून?
आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत बिना वारंट भी छापा मारा जा सकता है अगर “सूचना” हो कि टैक्स चोरी हो रही है। लेकिन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोर्ट्स कई बार राहत देते आए हैं। उदाहरण के तौर पर कई बीमार नेताओं को जांच में समय दिया गया है।
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