![]() |
| Image: Conceptual illustration by Ai. |
अयोध्या(उ.प्र.): कल्पना कीजिए – राम की नगरी अयोध्या। जहां हर तरफ भक्ति की गूंज है, दीपक जल रहे हैं, लेकिन एक छोटे से गांव में रात के अंधेरे में एक दलित बहन की इज्जत पर हमला हो जाता है। घर में घुसकर, रेप की कोशिश। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी। और जब आसपास के लोग जागते हैं, तो आरोपी भाग जाता है।
लेकिन सबसे दर्दनाक हिस्सा? शिकायत दर्ज कराने के 24 घंटे बाद भी पुलिस ने FIR नहीं लिखी!
यह कोई पुरानी कहानी नहीं। यह 21 फरवरी 2026 की रात की सच्ची घटना है। कुमारगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई यह वारदात आज पूरे उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने लिखित तहरीर दी, आरोपी को हिरासत में ले लिया गया, लेकिन FIR अभी तक दर्ज नहीं हुई।
क्या राम नगरी में न्याय इतना सस्ता हो गया है?
घटना का पूरा ब्योरा: घर में घुसा युवक, शुरू हुई दरिंदगी
21 फरवरी की रात। पीड़िता अपने घर में अकेली थी। आरोपी – जो उसके जीजा के घर रह रहा था – अचानक घर में घुस आया। महिला ने बताया, "वह रेप के इरादे से मेरे साथ छेड़छाड़ करने लगा।"
जब उसने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे जान से मारने और पीटने की धमकी दी। पीड़िता की चीखें सुनकर आसपास के लोग जागे। उनकी आहट पाकर आरोपी मौके से फरार हो गया।
रविवार सुबह पीड़िता थाने पहुंची। लिखित शिकायत दी। मिल्कीपुर थाना पुलिस (जिस क्षेत्र में कुमारगंज आता है) ने मामले की गंभीरता देखते हुए युवक को तुरंत हिरासत में ले लिया। पूछताछ जारी है। लेकिन FIR? 24 घंटे बीत गए, अभी तक नहीं दर्ज हुई।
पुलिस का कहना है – "तहरीर के आधार पर जांच चल रही है। मेडिकल रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद कार्रवाई होगी।"
लेकिन सवाल यह है – क्या प्रयासित बलात्कार जैसा गंभीर अपराध तहरीर पर ही अटक सकता है? भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 और 70 के तहत यह संज्ञेय अपराध है। CrPC की धारा 154 साफ कहती है – ऐसी शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज करनी होगी।
क्यों नहीं दर्ज हुई FIR? पुलिस की लापरवाही या कुछ और?
यह पहला मामला नहीं है जहां अयोध्या पुलिस FIR में देरी कर रही है। पिछले कई मामलों में भी यही पैटर्न देखा गया है – पहले हिरासत, फिर पूछताछ, फिर मेडिकल, और FIR आखिर में।
दलित महिला होने के नाते पीड़िता पर दबाव बनाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 17 छुआछूत समाप्त करता है, अनुच्छेद 15 भेदभाव रोकता है, लेकिन जमीनी हकीकत में दलित महिलाएं दोहरी लड़ाई लड़ती हैं – लिंग और जाति दोनों की।
SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत अगर आरोपी दूसरे वर्ग का है तो यह अतिरिक्त संरक्षण देता है। लेकिन FIR न दर्ज होने से पूरा मामला कमजोर पड़ जाता है। सबूत मिट सकते हैं, दबाव बढ़ सकता है।
महिला अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं – "24 घंटे की देरी मतलब न्याय में 24 घंटे की देरी।" क्या अयोध्या पुलिस को याद दिलाना पड़ेगा कि राम मंदिर की नगरी में भी कानून सबसे ऊपर है?
अयोध्या – भक्ति की नगरी, लेकिन अपराध की सच्चाई
राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या पर्यटन का केंद्र बन गई। लाखों श्रद्धालु आते हैं। लेकिन महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल बार-बार उठते हैं।
NCRB 2023 डेटा के अनुसार, उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए – 66,381। पूरे देश में 4.48 लाख मामले। UP में क्राइम रेट प्रति लाख महिलाओं पर 58.6 है, लेकिन संख्या सबसे ज्यादा क्योंकि आबादी भी सबसे ज्यादा।
अयोध्या जिले में हाल के वर्षों में दलित युवतियों पर हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। कभी हत्या, कभी गैंगरेप, कभी छेड़छाड़। हर बार राजनीति होती है, बयानबाजी होती है, लेकिन जमीनी बदलाव?
मिशन शक्ति केंद्रों के चलते UP सरकार दावा करती है कि रेप के मामले 33% कम हुए। लेकिन ऐसे मामले जहां FIR ही नहीं लिखी जाती, वे आंकड़ों में आते भी कहां हैं?
आगे क्या? कानूनी प्रावधान और जरूरी सुधार
- BNS धारा 63: महिलाओं की गरिमा भंग करने का प्रयास – 5 साल तक सजा।
- धारा 70: गैंगरेप या प्रयास – उम्रकैद तक।
- SC/ST Act: जातिगत अपमान या हमले पर अतिरिक्त सजा।
लेकिन कानून तभी काम करेगा जब FIR तुरंत दर्ज हो। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है – देरी करना पुलिस की लापरवाही है, जिस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
निष्कर्ष: न्याय मिलेगा या सिर्फ बयानबाजी?
अयोध्या की इस दलित बहन को न्याय चाहिए। FIR दर्ज हो, आरोप साबित हो, सजा हो। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी है – पूरे सिस्टम में बदलाव। ताकि कोई और बहन इस दर्द से न गुजरे।
राम की नगरी को सच्चा राम राज्य तभी बनेगा जब हर महिला बेखौफ घूम सके, बेखौफ सो सके।
यह भी पढ़ें: अयोध्या दलित महिला रेप प्रयास: 24 घंटे बाद FIR नहीं!

