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| Image: Facebook. |
पश्चिम बंगाल में देश की सर्वोच्च संवैधानिक कुर्सी यानी राष्ट्रपति पद के प्रोटोकॉल को लेकर मचा बवाल अब एक बड़े सियासी घमासान में बदल चुका है।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। 8 मार्च रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी अपने बयान में मायावती ने पश्चिम बंगाल के हालिया राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे "अति-दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया। यह विवाद तब खड़ा हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के उत्तर बंगाल दौरे पर 'ब्लू बुक' प्रोटोकॉल के तहत न तो मुख्यमंत्री उपस्थित रहीं और न ही राज्य का कोई कैबिनेट मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचा। मायावती ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति पद का राजनीतिकरण किसी भी लिहाज से उचित नहीं है और सभी को संवैधानिक पदों का सम्मान करना चाहिए।
घटना का पूरा विवरण: आखिर पश्चिम बंगाल में क्या हुआ?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंची थीं। तय कार्यक्रम के अनुसार यह आयोजन दार्जिलिंग जिले के बिधाननगर में होना था, लेकिन ऐन वक्त पर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थल को बदलकर गोशाईपुर कर दिया गया। इस बदलाव के कारण आयोजन स्थल काफी छोटा हो गया और कई आदिवासी समुदाय के लोग इसमें शामिल नहीं हो सके, जिस पर स्वयं राष्ट्रपति ने गहरी निराशा व्यक्त की।
इस West Bengal President visit controversy में सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब राष्ट्रपति के स्वागत के लिए तय प्रोटोकॉल के अनुसार न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही उनकी कैबिनेट का कोई वरिष्ठ मंत्री वहां मौजूद था। केवल सिलीगुड़ी के मेयर ने ही हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति की अगवानी की। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी नहीं था और उनके मार्ग पर कचरा पड़ा हुआ था, जिसे गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन माना गया है। खुद राष्ट्रपति ने इस प्रोटोकॉल उल्लंघन पर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके लिए तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए था।
संबंधित बयान / प्रतिक्रिया: Mayawati on Mamata government
मायावती बयान: "संवैधानिक पदों का सम्मान जरूरी"
इस President protocol controversy पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, BSP chief Mayawati statement सामने आया है। मायावती ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के आदर्श और मान-मर्यादा के मुताबिक सभी को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
मायावती ने इसे सीधे तौर पर संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया। राष्ट्रपति पद का राजनीतिकरण गलत बताते हुए मायावती ने कहा कि संवैधानिक पदों को दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के पद को लेकर भी हाल के दिनों में हो रही राजनीति को अनुचित बताया और अपील की कि सोमवार से शुरू हो रहा संसद सत्र देश व जनहित में सुचारू रूप से चलना चाहिए।
ममता बनर्जी का पलटवार
दूसरी ओर, इस मायावती ममता विवाद और केंद्र के हमलों के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी सरकार का बचाव किया। ममता बनर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन राज्य सरकार को इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन या फंडिंग की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि "राष्ट्रपति को भाजपा अपना एजेंडा चलाने के लिए भेज रही है"। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जब वह लोगों के अधिकारों की लड़ाई के लिए धरने पर बैठी हैं, तब हर कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए संभव नहीं है। ममता ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि जब मणिपुर, राजस्थान और महाराष्ट्र में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे थे, तब राष्ट्रपति ने सवाल क्यों नहीं उठाए।
प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नाराजगी व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उनका अपमान किया जाना "शर्मनाक और अभूतपूर्व" है। उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस घटना को आदिवासी स्वाभिमान और देश के संविधान पर हमला बताया।
राष्ट्रपति प्रोटोकॉल और केंद्र का एक्शन
इस पूरे विवाद की जड़ें राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े 'ब्लू बुक' नियमों के उल्लंघन में हैं। 'ब्लू बुक' एक गोपनीय सरकारी दस्तावेज है, जिसमें देश के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के सख्त नियम तय होते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से रविवार शाम 5 बजे तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। केंद्र ने राज्य से स्पष्टीकरण मांगा है कि 'ब्लू बुक' नियमों की अवहेलना क्यों की गई और दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट (DM), सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर (CP) जैसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
संभावित प्रभाव (Impact Analysis)
इस राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद का सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति और आने वाले समीकरणों पर पड़ेगा:
- आदिवासी और दलित राजनीति: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। मायावती द्वारा इस मुद्दे को उठाने से यह संदेश स्पष्ट है कि आदिवासी और दलित सम्मान के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- केंद्र बनाम राज्य सरकार टकराव: केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब करना यह दर्शाता है कि केंद्र इस मुद्दे पर सख्त है। इससे टीएमसी (TMC) और भाजपा (BJP) के बीच राजनीतिक लड़ाई और तीखी होगी।
- संसद सत्र पर प्रभाव: यद्यपि मायावती ने संसद के सुचारू रूप से चलने की उम्मीद जताई है, यह तय माना जा रहा है कि संसद के आगामी सत्र में यह मुद्दा भारी हंगामे का कारण बनेगा।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में सबसे बड़ी नजर केंद्रीय गृह मंत्रालय के कदम पर होगी। यदि पश्चिम बंगाल सरकार का जवाब केंद्र को संतोषजनक नहीं लगता है, तो संबंधित स्थानीय अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई हो सकती है। दूसरी तरफ, चुनावी माहौल में यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। तृणमूल कांग्रेस जहां इसे भाजपा की साजिश बताकर अपना बचाव कर रही है, वहीं भाजपा और बसपा जैसे दल इसे संवैधानिक गरिमा और आदिवासी स्वाभिमान का मुद्दा बनाकर ममता सरकार को घेरना जारी रखेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद (President protocol controversy) क्या है?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल (सिलीगुड़ी) दौरे पर उनके स्वागत के लिए तय प्रोटोकॉल के अनुसार राज्य की मुख्यमंत्री या कोई कैबिनेट मंत्री नहीं पहुंचा। साथ ही, सुरक्षा कारणों का हवाला देकर अंतिम समय में कार्यक्रम स्थल भी बदल दिया गया। केंद्र सरकार इसे (ब्लू बुक) प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन मान रही है।
राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद पर मायावती ने ममता बनर्जी के बारे में क्या कहा (Mayawati on Mamata government)
मायावती बयान में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति (जो एक महिला और आदिवासी समाज से हैं) के प्रोटोकॉल का पालन न होना अति-दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने ममता सरकार और विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और संवैधानिक पदों को दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।
ब्लू बुक (Blue Book) क्या है जिसका जिक्र इस विवाद में हो रहा है?
ब्लू बुक एक गोपनीय सरकारी मैन्युअल है, जिसमें भारत के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था, रूट प्लान और स्वागत प्रोटोकॉल से जुड़े सख्त नियम लिखे होते हैं। केंद्र ने पश्चिम बंगाल सरकार से इसी ब्लू बुक के नियमों के उल्लंघन पर रिपोर्ट मांगी है।

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