
संभल के ग्राम नाहरठेर में हाल ही में बसपा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। विधानसभा क्षेत्र 33 संभल के बूथ संख्या 211 और 212 का गठन किया गया। यह कार्यक्रम 'चलो बूथ की ओर' अभियान के तहत हुआ, जिसका मकसद जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। मुरादाबाद मंडल के मुख्य सेक्टर प्रभारी डॉ. रणविजय सिंह एडवोकेट ने संचालन किया।
मायावती के शासनकाल की यादें ताजा की गईं
बैठक में वक्ताओं ने बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री कुमारी मायावती के चार कार्यकालों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मायावती के समय में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई, प्रशासन में पारदर्शिता आई और सभी वर्गों को साथ लेकर विकास के काम हुए।
जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने कहा, "मायावती जी ने गरीब, मजदूर, किसान, व्यापारी और बेरोजगार युवाओं के हितों को हमेशा प्राथमिकता दी। प्रदेश का हर वर्ग आज भी सुशासन और भयमुक्त माहौल चाहता है।"
यह भावनात्मक अपील बसपा की पुरानी ताकत को याद दिलाती है – बहुजन समाज की आवाज बनना और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ना।
बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने का महत्व
बसपा की यह रणनीति कोई नई नहीं, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले इसे और तेज किया जा रहा है। बूथ कमेटियां चुनाव की रीढ़ होती हैं। हर बूथ पर सक्रिय कार्यकर्ता मतदाताओं तक पहुंचते हैं, मुद्दे उठाते हैं और वोट बैंक को एकजुट रखते हैं।
संभल जैसे क्षेत्र में, जहां जातीय और सामाजिक समीकरण जटिल हैं, बूथ स्तर की मजबूती पार्टी को फायदा पहुंचा सकती है। कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे किसी प्रलोभन में नहीं आएंगे और घर-घर जाकर बसपा की नीतियों का प्रचार करेंगे।
मिशन 2027
मायावती ने हाल में संगठन में बड़े फेरबदल किए हैं। कई वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां बदली गईं। पार्टी ने साफ कहा है कि 2027 में अकेले चुनाव लड़ेगी, कोई गठबंधन नहीं।
बूथ कमेटियों का गठन तेजी से हो रहा है। मायावती ने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी है कि व्यक्तिगत हितों से ऊपर पार्टी का हित रखें। ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम समीकरण पर भी फोकस है – 2007 वाली सोशल इंजीनियरिंग की यादें ताजा हो रही हैं।
संभल में मुस्लिम बहुल आबादी है, लेकिन दलित और अन्य पिछड़े वर्ग भी निर्णायक हैं। यहां बूथ मजबूत करने से बसपा को स्थानीय मुद्दों पर पकड़ बनाने में मदद मिल सकती है।
सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा का एंगल
बसपा का मूल मंत्र बहुजन समाज का उत्थान है। मायावती के शासन में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को आरक्षण, शिक्षा और नौकरियों में हिस्सेदारी मिली। आज जब सामाजिक न्याय पर सवाल उठ रहे हैं, बसपा खुद को संविधान की रक्षक के रूप में पेश कर रही है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार में भय का माहौल है। बसपा सुशासन लौटाने का वादा कर रही है। यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा मुद्दा है।
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भविष्य पर क्या असर?
अगर बसपा बूथ स्तर तक मजबूत हो गई, तो 2027 में मुकाबला रोचक हो सकता है। फिलहाल पार्टी सिर्फ एक सीट पर सिमटी है, लेकिन जमीनी तैयारी से वापसी संभव है।
संभल जैसे जिलों में सक्रियता बढ़ने से अन्य क्षेत्रों में भी जोश आएगा। क्या यह बसपा के लिए नया अध्याय साबित होगा?
क्या बसपा फिर से लौटेगी सत्ता की राह पर?
संभल में बूथ गठन बसपा की 2027 की रणनीति का छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा है। मायावती का फोकस जमीनी स्तर पर है – जहां असली ताकत छिपी होती है। अगर कार्यकर्ता एकजुट रहे, तो बहुजन समाज की आवाज फिर गूंज सकती है।
